दिवाली आते ही मिठाई की दुकानों पर लंबी कतारें लग जाती हैं। माँग इतनी बढ़ जाती है कि कुछ लोग कम लागत में ज़्यादा माल बनाने के लिए मिलावट का सहारा लेते हैं। हर साल त्योहारों के आसपास खाद्य विभाग की छापेमारी में मिलावटी खोया, पनीर और मिठाइयाँ पकड़ी जाने की खबरें आती हैं।
अच्छी बात यह है कि कुछ आम मिलावटें घर की रसोई में ही कुछ मिनटों में पहचानी जा सकती हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी लोगों के लिए ऐसे आसान घरेलू तरीके बताए हैं। ध्यान रखें कि ये जाँचें संकेत देती हैं, पक्का नतीजा सिर्फ़ लैब जाँच से मिलता है।
1. खोया या मावा में स्टार्च की जाँच
खोया महँगा होता है, इसलिए उसमें आलू, शकरकंद या आटे जैसा स्टार्च मिलाया जा सकता है।
कैसे जाँचें:
- थोड़ा सा खोया या खोये वाली मिठाई पानी में उबालकर ठंडा कर लें।
- उसमें आयोडीन टिंचर की 2-3 बूँदें डालें, जो दवा की दुकान पर मिल जाता है।
- अगर रंग नीला हो जाए तो उसमें स्टार्च मिला होने की संभावना है। शुद्ध खोया में ऐसा नहीं होता।
यही तरीका पनीर और छेना पर भी काम करता है।
2. चाँदी का वर्क असली है या एल्युमिनियम
काजू कतली और बर्फ़ी पर लगने वाला चमकीला वर्क असली चाँदी का होना चाहिए। कई बार इसकी जगह सस्ता एल्युमिनियम का वर्क लगा दिया जाता है, जो खाने के लिए ठीक नहीं माना जाता।
कैसे जाँचें:
- वर्क का छोटा टुकड़ा अलग करके जलाकर देखें। असली चाँदी जलने पर उसी वज़न की छोटी चमकीली गोली जैसी बन जाती है, जबकि एल्युमिनियम का वर्क धूसर-काली राख या पाउडर छोड़ता है।
- उँगलियों के बीच रगड़ने पर असली चाँदी का वर्क लगभग गायब हो जाता है, जबकि एल्युमिनियम का वर्क छोटे टुकड़ों में बचा रहता है।
3. दूध में डिटर्जेंट या पानी
दूध से बनी मिठाइयों की शुरुआत दूध से होती है, इसलिए घर में आने वाले दूध की जाँच भी ज़रूरी है।
- डिटर्जेंट की जाँच: थोड़ा दूध और उतना ही पानी एक बोतल में डालकर ज़ोर से हिलाएँ। अगर बहुत ज़्यादा और देर तक टिकने वाला झाग बने तो डिटर्जेंट की मिलावट हो सकती है। शुद्ध दूध में हल्का झाग बनता है जो जल्दी बैठ जाता है।
- पानी की जाँच: दूध की एक बूँद किसी चिकनी, थोड़ी तिरछी सतह पर डालें। शुद्ध दूध धीरे बहता है और पीछे सफेद लकीर छोड़ता है। पानी मिला दूध तेज़ी से बिना निशान छोड़े बह जाता है।
4. बहुत चटक रंग से सावधान
बहुत चमकीले लाल, हरे या पीले रंग की मिठाइयाँ देखने में आकर्षक लगती हैं, पर इनमें खाने में इस्तेमाल न होने वाले रंग मिले हो सकते हैं। मिठाई को थोड़े गुनगुने पानी में घोलें, अगर पानी में बहुत तेज़ रंग छूटे तो ऐसी मिठाई कम खरीदें। जहाँ तक हो, हल्के और प्राकृतिक रंग वाली मिठाइयाँ चुनें।
5. घी में मिलावट का संकेत
देसी घी वाली मिठाई की खुशबू और स्वाद अलग होता है। घर के घी की जाँच के लिए एक चम्मच घी गर्म करें। शुद्ध घी तुरंत पिघलकर भूरा-सुनहरा हो जाता है और अच्छी खुशबू देता है। अगर पिघलने में देर लगे, अजीब गंध आए या ठंडा होने पर अलग-अलग परतें दिखें, तो उसमें दूसरी चर्बी या तेल की मिलावट हो सकती है।
सुरक्षित मिठाई खरीदने के 6 नियम
- लाइसेंस वाली दुकान से खरीदें। दुकान पर FSSAI का लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर दिखना चाहिए।
- बेस्ट बिफोर तारीख देखें। FSSAI के नियम के अनुसार खुली बिकने वाली मिठाइयों की ट्रे पर भी बेस्ट बिफोर तारीख दिखानी ज़रूरी है। पूछने में झिझकें नहीं।
- खोये की मिठाई जल्दी खाएँ। खोये और छेने की मिठाइयाँ जल्दी खराब होती हैं, इन्हें फ्रिज में रखें और 1-2 दिन में खत्म करें।
- बहुत सस्ते ऑफर पर शक करें। अगर किसी मिठाई का दाम बाज़ार से बहुत कम हो, तो उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाना वाजिब है।
- सूखी मिठाइयों को प्राथमिकता दें। बेसन के लड्डू, सोन पापड़ी या ड्राई फ्रूट वाली मिठाइयाँ खोये वाली मिठाइयों से ज़्यादा दिन चलती हैं।
- घर पर बनाएँ। नारियल लड्डू, बेसन लड्डू या खीर जैसी आसान मिठाइयाँ घर पर बनाना सबसे सुरक्षित तरीका है।
मिलावट दिखे तो क्या करें
अगर आपको किसी दुकान की मिठाई या दूध में मिलावट का शक हो, तो FSSAI के Food Safety Connect ऐप या उसकी वेबसाइट पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। अपने ज़िले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी से भी संपर्क किया जा सकता है।
आखिरी बात
त्योहार की खुशी मिठाई के बिना अधूरी है, पर सेहत से समझौता करके नहीं। भरोसेमंद दुकान, ताज़ा मिठाई और घर पर ये आसान जाँचें, इन तीनों से आप और आपका परिवार सुरक्षित दिवाली मना सकते हैं। मिठाई खाने के बाद उल्टी, दस्त या पेट में तेज़ दर्द हो तो देर किए बिना डॉक्टर से मिलें।