ज़िंदगी

30 के बाद ये 3 बातें हर किसी को पता होनी चाहिए

By payalk.in डेस्क-21 अक्टूबर 20266 मिनट2

30 के बाद शरीर, पैसा और परिवार की सुरक्षा, तीनों के नियम बदल जाते हैं। जो लोग इसी उम्र में ये 3 काम शुरू कर देते हैं, उनकी 40 और 50 की उम्र बिल्कुल अलग दिखती है।

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20 से 30 की उम्र तक ज़्यादातर लोग मान कर चलते हैं कि अभी बहुत समय है। शरीर बिना मेहनत के साथ देता है, खर्च कम होते हैं और भविष्य की चिंता दूर की बात लगती है। लेकिन 30 पार करते ही तीन चीज़ें चुपचाप बदलने लगती हैं: शरीर की बनावट, पैसे के बढ़ने का समय और परिवार की ज़िम्मेदारी। अच्छी बात यह है कि ये तीनों बदलाव धीरे होते हैं, इसलिए अगर आप अभी समझ जाएँ तो इन्हें अपने पक्ष में मोड़ सकते हैं।

नीचे वो 3 बातें हैं जो 30 की उम्र में हर किसी को पता होनी चाहिए, साथ में यह भी कि आज से क्या करना है।

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बात 1: 30 के बाद शरीर हर साल थोड़ी मांसपेशी खोने लगता है

बहुत कम लोग जानते हैं कि लगभग 30 की उम्र के बाद शरीर की मांसपेशियाँ धीरे-धीरे घटने लगती हैं। हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार जो लोग शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहते, वे 30 के बाद हर दशक में अपनी मांसपेशियों का लगभग 3 से 5 प्रतिशत हिस्सा खो सकते हैं। इस स्थिति को सार्कोपेनिया की शुरुआत माना जाता है।

यह सुनने में छोटा लगता है, पर इसका असर बड़ा है:

  • मेटाबॉलिज़्म धीमा होता है। मांसपेशियाँ आराम के समय भी कैलोरी जलाती हैं। ये घटती हैं तो वही खाना पहले से ज़्यादा चर्बी बनाता है। यही कारण है कि कई लोग कहते हैं कि खाना तो उतना ही है, फिर भी पेट निकल आया।
  • कमर और घुटनों पर दबाव बढ़ता है। कमज़ोर मांसपेशियाँ जोड़ों को सहारा नहीं दे पातीं, इसलिए 35 के आसपास कमर दर्द आम हो जाता है।
  • थकान जल्दी होती है। सीढ़ियाँ चढ़ना, बच्चे को गोद में उठाना या सामान ढोना पहले जैसा आसान नहीं रहता।

आज से क्या करें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) वयस्कों को हर हफ्ते कम से कम 150 से 300 मिनट मध्यम कसरत, जैसे तेज़ चलना, और हफ्ते में कम से कम 2 दिन मांसपेशियों को मज़बूत करने वाली कसरत करने की सलाह देता है। इसके लिए जिम ज़रूरी नहीं है।

  • घर पर स्क्वैट, पुश-अप, दीवार के सहारे पुश-अप, प्लैंक और सीढ़ियाँ चढ़ना काफ़ी है।
  • हफ्ते में 2 से 3 दिन, 20 से 30 मिनट से शुरुआत करें।
  • खाने में दाल, दही, पनीर, अंडा, चना या सोयाबीन जैसी प्रोटीन वाली चीज़ें हर भोजन में रखें।
  • साल में एक बार बेसिक जाँच करवाएँ, जैसे ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और विटामिन D। कई बीमारियाँ 30 के दशक में बिना लक्षण के शुरू होती हैं और समय पर पकड़ में आ जाएँ तो आसानी से संभल जाती हैं।

बात 2: पैसे के बढ़ने के लिए आपका सबसे कीमती साल यही है

निवेश में सबसे बड़ी ताकत रकम नहीं, समय है। इसे कंपाउंडिंग कहते हैं, यानी कमाई पर भी कमाई होना। जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना कम पैसा लगाकर उतना बड़ा फंड बनेगा। एक आसान उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आप हर महीने 5,000 रुपये लगाते हैं और लंबे समय में औसत सालाना रिटर्न 12 प्रतिशत मिलता है:

शुरुआत की उम्र निवेश कितने साल कुल लगाए गए पैसे 60 की उम्र पर अनुमानित रकम
30 साल 30 साल 18 लाख रुपये लगभग 1.76 करोड़ रुपये
40 साल 20 साल 12 लाख रुपये लगभग 50 लाख रुपये

सिर्फ़ 10 साल की देरी से आपने 6 लाख रुपये कम लगाए, पर हाथ में आने वाली रकम एक करोड़ रुपये से भी ज़्यादा कम हो गई। यही कारण है कि 30 की उम्र को पैसे के लिहाज़ से सुनहरा समय कहा जाता है।

ध्यान रखें कि 12 प्रतिशत रिटर्न सिर्फ़ समझाने के लिए लिया गया अनुमान है। शेयर बाज़ार या म्यूचुअल फंड में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती और कुछ सालों में नुकसान भी हो सकता है।

आज से क्या करें

  • सैलरी आते ही पहले बचत अलग करें, खर्च बाद में। कम से कम 20 प्रतिशत बचाने का लक्ष्य रखें।
  • महंगे कर्ज़, खासकर क्रेडिट कार्ड का बकाया, सबसे पहले चुकाएँ। उस पर लगने वाला ब्याज़ किसी भी निवेश के रिटर्न से ज़्यादा होता है।
  • लंबे समय के लक्ष्य, जैसे रिटायरमेंट, के लिए हर महीने एक तय रकम का SIP शुरू करें, चाहे शुरुआत 1,000 रुपये से ही क्यों न हो। किसी भी फंड को चुनने से पहले SEBI रजिस्टर्ड सलाहकार से बात कर लें।
  • हर साल आमदनी बढ़ने पर SIP भी थोड़ा बढ़ाएँ।

बात 3: अब आप पर कोई निर्भर है, उसकी सुरक्षा पहले कीजिए

30 के आसपास ज़्यादातर लोगों की शादी हो चुकी होती है, बच्चे होते हैं या माता-पिता की ज़िम्मेदारी आ जाती है। अब अगर अचानक बीमारी, नौकरी जाने या किसी हादसे जैसी स्थिति आए, तो असर सिर्फ़ आप पर नहीं, पूरे परिवार पर पड़ता है। इसलिए निवेश से भी पहले ये तीन सुरक्षा कवच ज़रूरी हैं।

1. इमरजेंसी फंड

कम से कम 6 महीने के ज़रूरी खर्च के बराबर रकम ऐसी जगह रखें जहाँ से तुरंत निकाली जा सके, जैसे अलग बचत खाता या स्वीप FD। यह पैसा निवेश नहीं, बल्कि बुरे वक्त का सहारा है। इससे नौकरी छूटने या अचानक खर्च पर कर्ज़ नहीं लेना पड़ता।

2. हेल्थ इंश्योरेंस

सिर्फ़ ऑफिस वाले बीमे पर भरोसा न करें, क्योंकि नौकरी बदलते ही वह खत्म हो जाता है। 30 की उम्र में प्रीमियम कम होता है और आम तौर पर पहले से कोई बीमारी नहीं होती, इसलिए परिवार के लिए अपना अलग फैमिली फ्लोटर प्लान लेना सबसे सस्ता पड़ता है।

3. टर्म इंश्योरेंस

अगर कोई आपकी कमाई पर निर्भर है, तो टर्म प्लान ज़रूरी है। आम तौर पर सलाह दी जाती है कि कवर आपकी सालाना आमदनी का कम से कम 10 से 15 गुना हो। टर्म प्लान का प्रीमियम उम्र के साथ बढ़ता है, इसलिए 30 में लिया गया प्लान 40 के मुकाबले काफ़ी सस्ता पड़ता है। बीमा को निवेश के साथ न मिलाएँ; शुद्ध टर्म प्लान में कम पैसे में बड़ा कवर मिलता है।

30 की उम्र की एक छोटी चेकलिस्ट

  • हफ्ते में 2 दिन मांसपेशियों की कसरत और रोज़ 30 मिनट पैदल चलना
  • साल में एक बार बेसिक हेल्थ चेकअप
  • कमाई का कम से कम 20 प्रतिशत बचत, पहले बचत फिर खर्च
  • 6 महीने के खर्च का इमरजेंसी फंड
  • अपना अलग हेल्थ इंश्योरेंस
  • परिवार निर्भर है तो टर्म इंश्योरेंस
  • महंगे कर्ज़ से छुटकारा

आखिरी बात

30 की उम्र देर नहीं है, बल्कि सही समय है। इस उम्र में शरीर अभी भी जल्दी सुधार दिखाता है, बीमा सस्ता मिलता है और निवेश के लिए 25 से 30 साल का लंबा समय बचा होता है। ऊपर की तीनों बातों में से आज सिर्फ़ एक काम शुरू कर दीजिए, जैसे पहला SIP, पहला वर्कआउट या बीमा का कोटेशन। 40 की उम्र में आप खुद को इसके लिए धन्यवाद देंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या 30 की उम्र के बाद मांसपेशियाँ बढ़ाई जा सकती हैं?

हाँ। नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और पर्याप्त प्रोटीन से किसी भी उम्र में मांसपेशियाँ बढ़ाई जा सकती हैं। 30 की उम्र में शरीर काफ़ी जल्दी सुधार दिखाता है, बस हफ्ते में कम से कम 2 दिन नियमित रहना ज़रूरी है।

30 की उम्र में कितनी बचत होनी चाहिए?

कोई तय रकम नहीं है, पर एक अच्छा लक्ष्य है कि कम से कम 6 महीने का इमरजेंसी फंड हो, कोई महंगा कर्ज़ न हो और हर महीने कमाई का 20 प्रतिशत या उससे ज़्यादा बचत या निवेश में जा रहा हो।

टर्म इंश्योरेंस कितने का लेना चाहिए?

आम तौर पर कवर सालाना आमदनी का 10 से 15 गुना रखने की सलाह दी जाती है, साथ में होम लोन जैसे बड़े कर्ज़ भी जोड़ लें। अंतिम फैसला अपनी ज़रूरत के हिसाब से किसी जानकार से सलाह लेकर करें।

ऑफिस का हेल्थ इंश्योरेंस है, तो अलग पॉलिसी क्यों लें?

ऑफिस का बीमा नौकरी के साथ ही खत्म हो जाता है। उम्र बढ़ने या कोई बीमारी होने के बाद नई पॉलिसी लेना महंगा और मुश्किल हो सकता है, इसलिए कम उम्र में अपनी अलग पॉलिसी लेना सुरक्षित रहता है।

क्या 12 प्रतिशत रिटर्न पक्का मिलता है?

नहीं। लेख में 12 प्रतिशत सिर्फ़ कंपाउंडिंग समझाने के लिए अनुमान है। बाज़ार से जुड़े निवेश में रिटर्न ऊपर-नीचे होता है और कोई गारंटी नहीं होती।

स्रोत: WHO: Physical activity fact sheetHarvard Health: Preserve your muscle massSEBI Investor Website

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