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छठ पूजा 2026 कब है? नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक

By payalk.in डेस्क-21 अक्टूबर 20265 मिनट1

बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा पर्व छठ इस साल 13 से 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। जानिए चारों दिनों की तारीख, हर दिन का महत्व, प्रसाद और व्रत रखने वालों के लिए ज़रूरी बातें।

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छठ पूजा सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, बिहार और पूर्वांचल के लोगों के लिए घर लौटने की वजह है। साल भर बाहर रहने वाले लोग भी छठ पर गाँव पहुँचने की कोशिश करते हैं, घाट सजते हैं और हर घर में ठेकुआ की खुशबू फैलती है। यह उन गिने-चुने पर्वों में है जिसमें डूबते और उगते, दोनों सूरज की पूजा होती है।

इस साल छठ महापर्व 13 नवंबर 2026 (शुक्रवार) से 16 नवंबर 2026 (सोमवार) तक मनाया जाएगा। मुख्य दिन, यानी संध्या अर्घ्य, 15 नवंबर (रविवार) को है।

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छठ पूजा 2026: चारों दिन की तारीख

दिन रस्म तारीख
पहला दिन नहाय-खाय 13 नवंबर 2026, शुक्रवार
दूसरा दिन खरना (लोहंडा) 14 नवंबर 2026, शनिवार
तीसरा दिन संध्या अर्घ्य 15 नवंबर 2026, रविवार
चौथा दिन उषा अर्घ्य और पारण 16 नवंबर 2026, सोमवार

अर्घ्य का सही समय सूर्यास्त और सूर्योदय पर निर्भर करता है, जो हर शहर में कुछ मिनट अलग होता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग या स्थानीय पंडित से समय ज़रूर मिला लें।

पहला दिन: नहाय-खाय

छठ की शुरुआत घर और मन की शुद्धता से होती है। इस दिन व्रती नदी, तालाब या घर पर स्नान करके साफ़ कपड़े पहनती हैं। पूरे घर की सफाई होती है और सात्विक भोजन बनता है, जिसमें आम तौर पर लौकी की सब्ज़ी, चने की दाल और अरवा चावल होता है। व्रती दिन में एक बार यही भोजन करती हैं, और उसके बाद ही परिवार के बाकी लोग खाते हैं।

दूसरा दिन: खरना

खरना के दिन व्रती पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए रहती हैं। शाम को पूजा के बाद गुड़ की खीर (रसियाव), रोटी और केला का प्रसाद बनता है, जिसे व्रती ग्रहण करती हैं। यह प्रसाद मिट्टी के नए चूल्हे या साफ़ चूल्हे पर, आम की लकड़ी से बनाने की परंपरा है।

खरना का प्रसाद खाने के बाद से लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है, जो चौथे दिन सुबह के अर्घ्य के बाद ही टूटता है।

तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य

यह छठ का सबसे भव्य दिन है। घर पर ठेकुआ, चावल के लड्डू (कसार), फल और गन्ना जैसे प्रसाद तैयार होते हैं। शाम को परिवार प्रसाद से भरे बाँस के सूप और डाला लेकर घाट पर जाता है।

व्रती पानी में खड़ी होकर डूबते सूरज को अर्घ्य देती हैं। घाट पर छठ के पारंपरिक गीत गूँजते हैं और दीयों की रोशनी से पूरा माहौल सुनहरा हो जाता है। कई परिवार रात भर घाट या घर पर कोसी भरते हैं, जिसमें गन्ने के डंठलों के बीच दीये जलाए जाते हैं।

चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण

आखिरी दिन सुबह सूरज उगने से पहले ही परिवार फिर घाट पहुँचता है। व्रती उगते सूरज को अर्घ्य देती हैं, छठी मैया से परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं और फिर प्रसाद लेकर व्रत खोलती हैं, जिसे पारण कहते हैं। इसके बाद प्रसाद पड़ोसियों और रिश्तेदारों में बाँटा जाता है।

छठ का प्रसाद: ठेकुआ क्यों खास है

ठेकुआ छठ की पहचान है। यह गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बनता है और कलात्मक साँचे पर छापकर तला जाता है। गुड़ और घी की वजह से यह कई दिनों तक खराब नहीं होता, इसलिए घर से दूर रहने वालों तक भी पहुँचाया जाता है। इसके अलावा प्रसाद में मौसमी फल जैसे केला, नारियल, गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद और नींबू जैसी चीज़ें रखी जाती हैं।

छठ में सूर्य की पूजा क्यों

छठ में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा होती है। मान्यता है कि सूर्य जीवन, ऊर्जा और सेहत का स्रोत हैं। महाभारत की कथाओं में सूर्यपुत्र कर्ण के पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने और द्रौपदी व पांडवों द्वारा यह व्रत करने का ज़िक्र आता है। छठ की सबसे सुंदर बात यह है कि इसमें पहले डूबते सूरज को धन्यवाद दिया जाता है, फिर उगते सूरज को, यानी जीवन के हर पड़ाव के प्रति आभार।

व्रत रखने वालों के लिए सेहत की ज़रूरी बातें

36 घंटे का निर्जला व्रत शरीर के लिए बड़ी चुनौती है, खासकर उम्र अधिक हो या कोई बीमारी हो।

  • खरना से पहले के दिनों में खूब पानी पिएँ और हल्का, पौष्टिक खाना खाएँ।
  • डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी या गर्भावस्था में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
  • घाट पर ठंडे पानी में देर तक खड़े रहने से बचें, गर्म कपड़े और सूखे कपड़े साथ रखें।
  • चक्कर, कमज़ोरी या बेहोशी जैसा लगे तो परिवार को तुरंत बताएँ।
  • पारण के बाद एकदम भारी खाना न खाएँ। पहले पानी, फल और हल्की चीज़ें लें।

घाट पर सुरक्षा

घाटों पर भारी भीड़ होती है। बच्चों पर खास नज़र रखें, गहरे पानी में न जाएँ, प्रशासन की बनाई बैरिकेडिंग के अंदर ही रहें और कीमती सामान कम से कम ले जाएँ। घाट पर प्लास्टिक न फेंकें, क्योंकि छठ का संदेश ही प्रकृति और जल का सम्मान है।

आखिरी बात

छठ आस्था के साथ-साथ अनुशासन, सफाई और परिवार के मिलन का पर्व है। अगर आप इस साल घर जा रहे हैं, तो टिकट और तैयारी अभी से कर लें। और अगर घर से दूर हैं, तो अपने शहर के घाट पर भी उसी श्रद्धा से छठ मनाया जा सकता है। छठी मैया आपके परिवार को सुख और सेहत दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छठ पूजा 2026 कब है?

छठ पूजा 2026 में 13 नवंबर (नहाय-खाय) से 16 नवंबर (उषा अर्घ्य) तक है। मुख्य संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, रविवार को है।

खरना 2026 में कब है?

खरना 14 नवंबर 2026, शनिवार को है। इसी शाम प्रसाद लेने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।

छठ का व्रत कितने घंटे का होता है?

खरना के प्रसाद के बाद से उषा अर्घ्य के बाद पारण तक लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत होता है।

ठेकुआ किससे बनता है?

ठेकुआ गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बनता है और साँचे पर छापकर तला जाता है।

अर्घ्य का सही समय कैसे जानें?

अर्घ्य सूर्यास्त और सूर्योदय के समय दिया जाता है, जो हर शहर में अलग होता है। अपने शहर का पंचांग या स्थानीय पंडित से समय मिलाएँ।

स्रोत: Drik Panchang: Chhath Puja Calendar 2026

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