Payalk
योजना

4,700 सरकारी योजनाएं चल रही हैं, और आपको अपनी वाली का पता भी नहीं

सरकार का अपना पोर्टल है जो आपकी उम्र, आमदनी और राज्य पूछकर बता देता है कि आप किन योजनाओं के लिए पात्र हैं। न फीस, न एजेंट, न दफ़्तर के चक्कर। दिक्कत सिर्फ़ इतनी है कि ज़्यादातर लोगों को इसका नाम तक नहीं पता।

सुमिता रवानी3 मिनट का पाठ
स्मार्टफोन पर सरकारी योजना देखती महिला

एक नज़र में

  • myScheme सरकार का अपना पोर्टल है, जिस पर 4,700 से ज़्यादा केंद्र और राज्य की योजनाएं मौजूद हैं
  • उम्र, आमदनी, राज्य और वर्ग भरते ही आपकी पात्रता वाली योजनाओं की लिस्ट सामने आ जाती है
  • पोर्टल हिंदी समेत 15 भाषाओं में उपलब्ध है और पूरी तरह मुफ़्त है
  • हर योजना की पात्रता, ज़रूरी दस्तावेज़ और आवेदन का लिंक एक ही जगह मिल जाता है
  • कोई एजेंट इसके लिए पैसे मांगे तो समझ लीजिए वो ठगी कर रहा है

गाँव के CSC सेंटर पर एक कतार लगी रहती है। लोग पूछते हैं — "भैया, हमारे लिए कोई योजना है क्या?"

जवाब में जो नाम गिनाए जाते हैं, वो वही चार-पाँच होते हैं जो सबको पता हैं। बाकी सैकड़ों योजनाएं, जिनके लिए आप शायद पात्र हैं, कभी सामने आती ही नहीं।

यह जानकारी की कमी नहीं है। यह जानकारी के बिखरे होने की समस्या है।

असली दिक्कत क्या है

केंद्र सरकार की अलग वेबसाइट। राज्य सरकार की अलग। हर मंत्रालय का अपना पोर्टल। किसानों की योजना कृषि विभाग की साइट पर, छात्रवृत्ति शिक्षा विभाग की साइट पर, पेंशन समाज कल्याण की साइट पर।

एक आम आदमी इन सबको खंगालकर यह पता नहीं लगा सकता कि उसके लिए क्या है। नतीजा — जो योजना उसके नाम की बनी है, वो उस तक पहुँचती ही नहीं।

इसी दिक्कत को दूर करने के लिए सरकार ने एक पोर्टल बनाया है।

myScheme क्या है

myScheme भारत सरकार का अपना पोर्टल है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन चलाता है।

इसका मक़सद सीधा है — केंद्र, राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की सारी योजनाएं एक ही जगह लाना, और आपकी पात्रता के हिसाब से आपको दिखाना।

फ़िलहाल इस पर 4,700 से ज़्यादा योजनाएं मौजूद हैं, और नई योजनाएं लगातार जोड़ी जा रही हैं।

सबसे बड़ी बात — यह हिंदी समेत 15 भाषाओं में काम करता है। यानी अंग्रेज़ी न आने की वजह से अब कोई पीछे नहीं रहेगा।

इस्तेमाल कैसे करें

पूरी प्रक्रिया तीन चरणों की है।

पहला चरण — myscheme.gov.in खोलिए और "Find Scheme" पर जाइए। यहाँ आपसे कुछ बुनियादी जानकारी माँगी जाएगी: उम्र, लिंग, राज्य, सालाना आमदनी, सामाजिक वर्ग, पेशा।

दूसरा चरण — जानकारी भरते ही पोर्टल हज़ारों योजनाओं में से छाँटकर सिर्फ़ वही दिखाता है जिनके लिए आप पात्र हैं।

तीसरा चरण — किसी भी योजना पर क्लिक कीजिए। उसका पूरा ब्यौरा खुलेगा — क्या लाभ मिलेगा, कौन-कौन से दस्तावेज़ लगेंगे, आवेदन कैसे करना है, और सीधे आवेदन वाले पेज का लिंक।

कोई रजिस्ट्रेशन नहीं, कोई लॉगिन नहीं, कोई शुल्क नहीं।

किस तरह की योजनाएं मिलेंगी

पोर्टल पर योजनाएं श्रेणियों में बँटी हैं, ताकि आप सीधे अपने काम की चीज़ तक पहुँच सकें।

छात्रवृत्ति और शिक्षा सहायता। बैंक ऋण और सब्सिडी। बीमा और स्वास्थ्य सुविधाएं। पेंशन। कौशल प्रशिक्षण। कृषि और किसान सहायता। आवास। महिला और बाल विकास।

अगर आपके घर में कोई छात्र है, कोई बुज़ुर्ग है, कोई खेती करता है, या कोई छोटा कारोबार शुरू करना चाहता है — किसी न किसी के लिए कुछ न कुछ ज़रूर निकलेगा।

एक ज़रूरी सावधानी

यह सुविधा पूरी तरह मुफ़्त है।

अगर कोई एजेंट, दुकानदार या "जानकार" आपसे योजना खोजने या फ़ॉर्म भरने के नाम पर पैसे माँगे, तो वो आपकी अनजानी का फ़ायदा उठा रहा है।

और ध्यान रखिए — सही पता सिर्फ़ myscheme.gov.in है। मिलते-जुलते नाम वाली बहुत सी नकली साइटें बनी हुई हैं। सरकारी वेबसाइट का पता हमेशा gov.in पर ख़त्म होता है।

सबसे ज़्यादा फ़ायदा किसे

उन्हें, जो अब तक इसलिए छूटते रहे क्योंकि उन तक ख़बर ही नहीं पहुँची।

गाँव की महिलाएं जिन्हें स्वरोज़गार की योजनाओं का पता नहीं। वो छात्र जिनकी पढ़ाई पैसे की वजह से रुक गई, जबकि छात्रवृत्ति मौजूद थी। वो बुज़ुर्ग जो पेंशन के हक़दार हैं पर आवेदन ही नहीं कर पाए।

दस मिनट लगेंगे। हो सकता है कुछ न निकले। और हो सकता है कुछ ऐसा निकल आए जिसका आपको अंदाज़ा भी नहीं था।

योजना न मिलने की सबसे बड़ी वजह पात्रता नहीं, जानकारी है।

सुमिता रवानी

सुमिता रवानी

सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट — सरकारी योजना और नागरिक सेवाएं

सुमिता रवानी 8 साल से केंद्र और राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं पर लिख रही हैं। उनका काम सरकारी अधिसूचनाओं और पोर्टल की उलझी भाषा को आम पाठक के लिए आसान बनाना है। वे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं तक पहुँच की समस्या पर रिपोर्टिंग करती रही हैं।