ड्यूटी पर बनाया मस्ती का वीडियो, तीनों की नौकरी गई
कुछ सेकंड का वीडियो, थोड़ी सी शोहरत की चाहत — और तीन महिलाओं की नौकरी खत्म। दुर्ग के सरकारी अस्पताल की ये घटना उस सवाल पर आ टिकी है जो आज हर नौकरीपेशा के सामने है।
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एक नज़र में
- दुर्ग जिला अस्पताल की अटल आरोग्य लैब में तीन महिला कर्मियों ने ड्यूटी के दौरान वीडियो बनाया।
- वीडियो में टेस्ट ट्यूब हाथ में लेकर कैटवॉक और कुर्सी पर मस्ती करते हुए दिखाया गया।
- वीडियो के फैलते ही सिविल सर्जन ने सेवा देने वाली कंपनी को नोटिस जारी किया।
- जांच के बाद कंपनी ने तीनों को सेवा से हटा दिया।
- अस्पताल, बैंक और सरकारी दफ्तरों में मरीजों और ग्राहकों की निजता का मामला भी जुड़ जाता है।
कुछ सेकंड का एक वीडियो। हाथ में टेस्ट ट्यूब, कुर्सी पर थोड़ी मस्ती, लैब के गलियारे में चलती हुई तीन महिलाएं। बनाने में शायद दस मिनट लगे होंगे।
नतीजा — तीनों की नौकरी चली गई।
हुआ क्या
मामला छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल का है। यहां की अटल आरोग्य लैब में काम करने वाली तीन महिला कर्मियों ने ड्यूटी के वक्त वीडियो बनाया। उसमें वे टेस्ट ट्यूब हाथ में लेकर चलती दिखीं, कुर्सी पर हंसी-ठिठोली करती दिखीं। वीडियो उन्होंने खुद ही इंटरनेट पर डाल दिया।
फिर वही हुआ जो अकसर होता है — वीडियो फैल गया। और अस्पताल प्रबंधन तक पहुंच गया।
सिविल सर्जन ने सेवा देने वाली कंपनी के प्रभारी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा। कंपनी ने मामले की जांच की और तीनों महिला कर्मियों को सेवा से हटा दिया।
सवाल जो सबके मन में है
इस खबर पर सबसे ज्यादा जो बात कही जा रही है, वो ये — क्या दस मिनट की मस्ती की इतनी बड़ी सजा बनती है?
जवाब इस पर टिका है कि जगह कौन सी थी।
एक निजी दफ्तर में सहकर्मियों के साथ हंसी-मजाक का वीडियो अलग बात है। एक अस्पताल की जांच लैब अलग बात है। वहां जो नमूने रखे होते हैं, वो किसी मरीज के होते हैं। जो कुर्सी और मेज दिख रही है, उसके पीछे नाम, बीमारी और रिपोर्ट दर्ज होती है। सरकारी अस्पताल की लैब कोई पृष्ठभूमि नहीं है — वो एक भरोसे की जगह है।
यही वजह है कि अस्पतालों में इस तरह के मामलों पर कार्रवाई तेज और कड़ी होती है।
कहां-कहां ये भारी पड़ सकता है
अगर आप इनमें से किसी जगह काम करते हैं, तो ये बात याद रखने लायक है:
अस्पताल और जांच केंद्र — मरीज की निजता सबसे ऊपर है। पीछे कोई मरीज, कोई रिपोर्ट, कोई नमूना दिख गया तो मामला सिर्फ अनुशासन का नहीं रह जाता।
बैंक और बीमा दफ्तर — ग्राहक की जानकारी और तिजोरी वाला हिस्सा कैमरे में आना गंभीर चूक मानी जाती है।
सरकारी दफ्तर — यहां आचरण नियम अलग से लागू होते हैं। "छवि खराब करने" वाला आधार अपने आप में कार्रवाई के लिए काफी माना जाता है।
कारखाने और गोदाम — मशीन चलने के दौरान ध्यान भटकाना सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होता है।
ठेके पर मिली नौकरी — ये सबसे कमजोर स्थिति है। दुर्ग वाली घटना में भी तीनों महिलाएं सीधे अस्पताल की कर्मचारी नहीं थीं, बल्कि सेवा देने वाली कंपनी के जरिए रखी गई थीं। ऐसे में जांच और हटाने की प्रक्रिया बहुत छोटी हो जाती है।
अगर आपको वीडियो बनाना ही है
बनाइए। पर ये पांच बातें ध्यान रखिए:
एक — ड्यूटी के घंटों में नहीं। खाने के वक्त या छुट्टी के बाद।
दो — काम की जगह के भीतर नहीं। बाहर, सीढ़ी पर, कैंटीन में।
तीन — वर्दी में नहीं। पहचान-पत्र गले में लटका हो तो और भी नहीं।
चार — पीछे कोई फाइल, कागज, स्क्रीन या दूसरा व्यक्ति न दिखे।
पांच — अपनी कंपनी का नियम एक बार पढ़ लीजिए। ज्यादातर जगह ये नियम मौजूद होता है, बस किसी ने पढ़ा नहीं होता।
असली सबक
इस घटना का सबक ये नहीं है कि वीडियो बनाना गलत है। सबक ये है कि आज हर वीडियो एक सार्वजनिक बयान है।
जो चीज आपने अपने सौ दोस्तों के लिए बनाई थी, वो चौबीस घंटे में लाखों लोगों तक पहुंच सकती है — और उनमें आपका बॉस, आपका विभाग और आपके संस्थान की शिकायत शाखा भी शामिल है। एक बार बाहर गया वीडियो वापस नहीं आता। हटा देने से भी नहीं, क्योंकि तब तक किसी न किसी ने उसे सहेज लिया होता है।
दस मिनट की मस्ती और महीनों की तनख्वाह के बीच का फैसला अब हर रोज लेना पड़ता है। और ज्यादातर लोग ये फैसला लेते वक्त सोचते ही नहीं कि वे कोई फैसला ले रहे हैं।
जो चीज आपने अपने सौ दोस्तों के लिए बनाई थी, वो चौबीस घंटे में लाखों लोगों तक पहुंच सकती है — और उनमें आपका बॉस भी शामिल है।
सुमिता रवानी
सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट — सरकारी योजना और नागरिक सेवाएं
सुमिता रवानी 8 साल से केंद्र और राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं पर लिख रही हैं। उनका काम सरकारी अधिसूचनाओं और पोर्टल की उलझी भाषा को आम पाठक के लिए आसान बनाना है। वे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं तक पहुँच की समस्या पर रिपोर्टिंग करती रही हैं।
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