43 लाख महिलाओं ने इस स्कीम में पैसा लगाया था — अब वो खुलती ही नहीं
महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र 31 मार्च 2025 को बंद हो गया था। लेकिन आज भी सैकड़ों वीडियो और वेबसाइट "2026 में आवेदन करें" बता रही हैं। जिनका खाता पहले से खुला है, उनका पैसा सुरक्षित है — और जो अब निवेश करना चाहती हैं
एक नज़र में
- नए खाते 1 अप्रैल 2025 से बंद हैं — कोई भी बैंक या पोस्ट ऑफिस अब इसमें खाता नहीं खोल सकता।
- जिनका खाता पहले से खुला है, उन्हें मैच्योरिटी तक पूरा 7.5% ब्याज मिलेगा। पैसा कहीं फँसा नहीं है।
- खाता खुलने के एक साल बाद 40% तक आंशिक निकासी की सुविधा अब भी लागू है।
- अभी निवेश करना है तो सुकन्या समृद्धि, NSC और PPF तीनों खुले हैं — ब्याज दर पोस्ट ऑफिस की मौजूदा तिमाही सूची से जाँच लें।
अगर आप यूट्यूब पर "महिला सम्मान बचत पत्र" खोजें, तो आज भी ऐसे वीडियो मिल जाएंगे जिनके शीर्षक में 2026 लिखा है और नीचे "अभी आवेदन करें" का लिंक है। कुछ वेबसाइटें तो फॉर्म भरने का पूरा तरीका भी बता रही हैं।
दिक्कत सिर्फ़ इतनी है कि यह योजना अब है ही नहीं।
असल में हुआ क्या था
महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र की घोषणा 2023-24 के बजट में हुई थी। इसमें महिलाओं और बच्चियों के नाम पर दो साल के लिए ज़्यादा से ज़्यादा दो लाख रुपये जमा किए जा सकते थे, और उस पर 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज मिलता था, जो हर तिमाही जुड़ता था।
यह योजना शुरू से ही सीमित समय के लिए थी — अप्रैल 2023 से मार्च 2025 तक। सरकार ने इसे आगे नहीं बढ़ाया। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने 27 मार्च 2025 की चिट्ठी में यह साफ़ कर दिया था, और डाक विभाग ने इसे SB Order No. 03/2025 के ज़रिए सभी डाकघरों तक पहुँचा दिया।
यानी 1 अप्रैल 2025 के बाद से कोई भी बैंक या डाकघर इस योजना में नया खाता नहीं खोल सकता। 2026-27 के बजट में भी इसे दोबारा शुरू करने की कोई घोषणा नहीं हुई।
अफ़वाह फैलती क्यों रही
जो सामग्री एक बार इंटरनेट पर चढ़ जाती है, वह हटती नहीं। 2023 और 2024 में बने हज़ारों वीडियो और ब्लॉग अब भी वहीं पड़े हैं। कई वेबसाइटें हर साल सिर्फ़ शीर्षक में साल का नंबर बदल देती हैं — 2024 की जगह 2025, फिर 2026 — और बाकी लेख वैसा का वैसा छोड़ देती हैं।
ऐसा लेख पढ़ने वाली महिला को लगता है कि योजना चालू है। वह डाकघर जाती है, और वहाँ पता चलता है कि खाता खुल ही नहीं सकता।
जिनका खाता पहले से खुला है, उनका क्या
यह ज़रूरी बात है, क्योंकि यहीं सबसे ज़्यादा घबराहट होती है।
योजना बंद होने का मतलब सिर्फ़ इतना है कि नए खाते नहीं खुलेंगे। जो खाते 31 मार्च 2025 तक खुल चुके थे, वे अपनी दो साल की अवधि पूरी होने तक चलते रहेंगे और उन पर पूरा 7.5 प्रतिशत ब्याज मिलेगा।
यह दर खाता खुलने के समय ही तय हो गई थी और बीच में नहीं बदलेगी, चाहे दूसरी छोटी बचत योजनाओं की दरें ऊपर-नीचे होती रहें।
निकासी के नियम
खाता खुलने के एक साल बाद जमा रकम का 40 प्रतिशत तक निकाला जा सकता है। बाकी पैसा मैच्योरिटी पर ब्याज समेत मिल जाता है।
अगर आपका खाता 2025 की शुरुआत में खुला था, तो वह 2027 की शुरुआत में मैच्योर होगा। मैच्योरिटी के बाद रकम अपने आप खाते में नहीं आती — डाकघर या बैंक जाकर बंद कराना पड़ता है।
अब पैसा कहाँ लगाएँ
तीन विकल्प खुले हुए हैं और तीनों सरकार समर्थित हैं।
सुकन्या समृद्धि योजना दस साल से कम उम्र की बच्ची के नाम पर खुलती है और छोटी बचत योजनाओं में सबसे ज़्यादा ब्याज देती है। राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र यानी NSC पाँच साल का है और इसमें आयकर की धारा 80C के तहत छूट भी मिलती है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF पंद्रह साल का लंबा विकल्प है, जिसमें ब्याज पर टैक्स नहीं लगता।
ब्याज दरें हर तिमाही बदलती हैं, इसलिए खाता खुलवाने से पहले डाकघर की मौजूदा दर सूची ज़रूर देख लें।
आगे ऐसी अफ़वाह से कैसे बचें
किसी भी सरकारी योजना के बारे में सबसे भरोसेमंद जगह सरकार का अपना पोर्टल है। myScheme पर जाकर योजना का नाम खोजें — अगर वह बंद हो चुकी है, तो वहाँ आवेदन का विकल्प नहीं मिलेगा।
दूसरा तरीका और आसान है। जिस डाकघर या बैंक शाखा में आप खाता खुलवाना चाहती हैं, वहाँ जाकर सीधे पूछ लें। किसी वीडियो या फॉरवर्ड किए गए मैसेज पर भरोसा करने से पहले यह एक फ़ोन कॉल बहुत कुछ बचा सकता है।
योजना बंद होने का मतलब सिर्फ़ इतना है कि नए खाते नहीं खुलेंगे। पुराना पैसा कहीं फँसा नहीं है।
कामिनी सोरेला
सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट — पर्सनल फाइनेंस
कामिनी सोरेला पिछले 9 साल से डिजिटल पेमेंट, बैंकिंग नियम और पर्सनल फाइनेंस कवर करती हैं। RBI और NPCI के सर्कुलर को आम भाषा में समझाना उनका काम है। पहले दो नेशनल बिज़नेस चैनलों में रिपोर्टिंग कर चुकी हैं।
