इस सरकारी योजना में मिलते हैं ₹3 लाख — जानिए कैसे और किसे
पीएम विश्वकर्मा योजना में तीन लाख तक का लोन सिर्फ़ 5 प्रतिशत ब्याज पर मिलता है, बिना किसी गारंटी के। लेकिन आवेदन से पहले चार शर्तें ऐसी हैं जिनकी वजह से लाखों लोग बीच रास्ते से लौट आते हैं
एक नज़र में
- तीन लाख एक साथ नहीं मिलते — पहले एक लाख, और उसे 18 महीने में चुकाने के बाद ही दो लाख की दूसरी किस्त।
- पिछले पाँच साल में PMEGP, मुद्रा या पीएम स्वनिधि का लोन लिया हो तो पात्रता नहीं। पूरा चुका दिया हो तो मुद्रा और स्वनिधि वालों के लिए रास्ता खुला है।
- घर में कोई सरकारी नौकरी में है — तो पूरा परिवार इस योजना से बाहर है।
- एक परिवार से सिर्फ़ एक व्यक्ति। यहाँ परिवार का मतलब है पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे।
"तीन लाख का लोन, वो भी बिना गारंटी" — ये लाइन आपने भी कहीं न कहीं सुनी होगी। यूट्यूब पर, किसी व्हाट्सएप ग्रुप में, या गली के उस दोस्त से जिसने कहीं कुछ पढ़ लिया है।
लाइन ग़लत नहीं है। पीएम विश्वकर्मा योजना में सच में तीन लाख तक का लोन मिलता है, सिर्फ़ पाँच प्रतिशत ब्याज पर, और उसके लिए कोई गारंटी नहीं देनी पड़ती।
दिक्कत ये है कि जो चार बातें आगे बताई जा रही हैं, वो ज़्यादातर वीडियो में नहीं आतीं। और यही वो बातें हैं जिनकी वजह से आदमी सीएससी सेंटर तक जाता है और खाली हाथ लौट आता है।
एक: तीन लाख एक साथ नहीं मिलते
लोन दो हिस्सों में आता है।
पहले चरण में एक लाख रुपये मिलते हैं, जिन्हें 18 महीने में चुकाना होता है। अगर आपने समय पर पूरा चुका दिया और खाता ठीक चलता रहा, तब जाकर दूसरे चरण में दो लाख रुपये मिलते हैं, जिनकी अवधि 30 महीने की होती है।
यानी तीन लाख तक पहुँचने में कम से कम डेढ़ साल लगता है। जो लोग ये सोचकर आवेदन करते हैं कि एक बार में तीन लाख हाथ में आ जाएंगे, उन्हें यहीं झटका लगता है।
एक और बात। पहली किस्त भी सीधे नहीं मिलती — पहले बेसिक ट्रेनिंग पूरी करनी पड़ती है।
दो: पुराना सरकारी लोन रास्ता रोक देता है
ये सबसे बड़ी वजह है जिससे आवेदन अटकते हैं।
अगर आपने पिछले पाँच साल में PMEGP, मुद्रा या पीएम स्वनिधि जैसी किसी सरकारी स्वरोज़गार योजना से लोन लिया है, तो आप पीएम विश्वकर्मा के लिए पात्र नहीं हैं।
लेकिन इसमें एक छूट है जो कम लोगों को पता है। मुद्रा और पीएम स्वनिधि का लोन अगर आपने पूरी तरह चुका दिया है, तो आप फिर से पात्र हो जाते हैं।
रजिस्ट्रेशन के समय आधार से जुड़े लोन रिकॉर्ड देखे जाते हैं, इसलिए ये सवाल छिपाने की कोशिश करने का कोई फ़ायदा नहीं। आवेदन वहीं रुक जाता है।
तीन: घर में सरकारी नौकरी है तो योजना बाहर है
नियम साफ़ है — सरकारी सेवा में लगे व्यक्ति और उनके परिवार के सदस्य इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
यानी अगर आप ख़ुद बढ़ई हैं लेकिन आपकी पत्नी किसी सरकारी विभाग में हैं, तो आपका आवेदन नहीं होगा। रजिस्ट्रेशन फॉर्म में ये सवाल सीधे पूछा जाता है।
चार: एक परिवार, एक आदमी
पंजीकरण और लाभ, दोनों एक परिवार में सिर्फ़ एक सदस्य तक सीमित हैं।
यहाँ परिवार की परिभाषा तय है — पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे। इसका मतलब ये हुआ कि अगर दो भाई अलग-अलग परिवार चलाते हैं और दोनों शादीशुदा हैं, तो दोनों अलग परिवार माने जाएंगे और दोनों आवेदन कर सकते हैं।
लेकिन एक ही घर में पति और पत्नी दोनों आवेदन नहीं कर सकते, चाहे दोनों अलग-अलग काम करते हों।
लोन के अलावा क्या मिलता है
ये हिस्सा अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है, जबकि कई कारीगरों के लिए ये लोन से ज़्यादा काम का है।
ट्रेनिंग के दौरान हर दिन के हिसाब से भत्ता मिलता है, जो सीधे बैंक खाते में आता है। बेसिक ट्रेनिंग शुरू होने पर स्किल असेसमेंट के बाद औज़ार ख़रीदने के लिए ई-वाउचर मिलता है। इसके साथ पहचान पत्र और प्रमाणपत्र भी मिलता है, जो बैंक में और बाज़ार में काम आता है।
जिस कारीगर के पास ठीक औज़ार नहीं हैं, उसके लिए यही हिस्सा सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
आवेदन कहाँ होता है
ये आख़िरी उलझन है। पीएम विश्वकर्मा का पंजीकरण घर बैठे ऑनलाइन नहीं होता।
नज़दीकी सीएससी सेंटर पर जाना पड़ता है, जहाँ आधार से बायोमेट्रिक सत्यापन होता है। पोर्टल pmvishwakarma.gov.in मुख्य रूप से स्थिति देखने के लिए है, आवेदन के लिए नहीं।
पंजीकरण मुफ़्त है। अगर कोई इसके लिए पैसे माँगे, तो वो नियम के ख़िलाफ़ है।
जाने से पहले
आवेदन करने से पहले तीन चीज़ें साफ़ कर लीजिए — आपका काम उन 18 पारंपरिक कामों की सूची में आता है या नहीं, पिछले पाँच साल में कोई सरकारी लोन तो नहीं लिया, और घर में कोई सरकारी नौकरी में तो नहीं है।
इन तीनों का जवाब सही हुआ, तो बाक़ी प्रक्रिया सीधी है। और अगर कोई एक भी शर्त अटक रही है, तो सीएससी तक जाने से पहले ही पता चल जाना बेहतर है।
तीन लाख तक पहुँचने में कम से कम डेढ़ साल लगता है। ये बात ज़्यादातर वीडियो में नहीं आती।
सुमिता रवानी
सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट — सरकारी योजना और नागरिक सेवाएं
सुमिता रवानी 8 साल से केंद्र और राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं पर लिख रही हैं। उनका काम सरकारी अधिसूचनाओं और पोर्टल की उलझी भाषा को आम पाठक के लिए आसान बनाना है। वे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं तक पहुँच की समस्या पर रिपोर्टिंग करती रही हैं।
